आखिरकार सात दिनों के बाद खत्म हुई डॉक्टरों की हड़ताल, सोमवार से लौटेंगे सभी डॉक्टर काम पर
जयपुर। पिछले करीब एक सप्ताह से चली आ रही सेवारत चिकित्सकों की हड़ताल आज आखिरकार सरकार के साथ हुई वार्ता में सहमति बनने के बाद समाप्त हो गई है। रविवार दोपहर दो बजे से शुरू हुई वार्ता के करीब 7 घंटे बाद लगभग सभी मांगों पर सहमति बनी और इसके बाद समझौता पत्र पर हस्ताक्षर कर सेवारत चिकित्सकों की हड़ताल समाप्ति का मार्ग प्रशस्त हुआ। हड़ताल समाप्त होने के साथ ही सभी डॉक्टर कल सोमवार सुबह से काम पर लौट आएंगे।
सचिवालय में आज दोपहर दो बजे शुरू हुई के दौरान 33 सूत्रीय मांगों के एक-एक बिंदु पर दोनों पक्षों के बीच विचार हुआ, जिसके बाद समझौते के ड्राफ्ट पर दोनों पक्षों ने हस्ताक्षर किए। इससे पहले शाम करीब पांच डॉ. चौधरी और उनके साथी सरकार के साथ चल रही बातचीत को बीच में छोड़कर एक बार बाहर आ गए थे। उन्होंने मंत्री और अफसरों पर डॉक्टरों की मांगों को लेकर अड़ियल रवैया अपनाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी हठधर्मिता नहीं छोड़ना चाहती। दरअसल, उस वक्त रेजीडेंट डॉक्टर्स की मांगों, ग्रेड पे, एरियर और एकल पारी में ड्यूटी की मांग पर गतिरोध बना हुआ था।
अरिस्दा एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष और चूरू सीएमएचओ डॉ. अजय चौधरी ने बताया कि सरकार के साथ हुई वार्ता में चिकित्सकों की लगभग सभी मांगों को मान लिया गया है। सकारात्मक माहौल में हुई इस वार्ता में हालांकि कई बार माहौल गर्म हुआ और वार्ता बीच में ही टूटती नजर आई। वार्ता के दौरान ही मौके पर भारी पुलिस जाब्ता बलाए जाने को लेकर एकबारगी तो चिकित्सकों में गिरफ्तारी का भय भी बना, लेकिन आखिरकार वार्ता में सहमति बन गई और हड़ताल समाप्ति का रास्ता निकल आया।
चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ की मौजूदगी में हर इस वार्ता में अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त डी बी गुप्ता, प्रमुख शासन सचिव गृह दीपक उप्रेती, प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा वीनू गुप्ता , चिकित्सा शिक्षा सचिव आनंद कुमार , वित्त सचिव मंजू राजपाल सहित अन्य अधिकारीगण शामिल थे। चिकित्सा संघ की ओर से अध्यक्ष डॉ अजय चौधरी, डॉ जगदीश मोदी, डॉ लक्ष्मण ओला, डॉ नसरीन भारती, डॉ मोहन लाल सिंधी शामिल थे।
उल्लेखनीय है कि अपनी 33 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेशभर में सेवारत चिकित्सक छह नवंबर से हड़ताल पर चले गए थे, जिसके बाद उनके समर्थन में रेजीडेंट डॉक्टर्स भी शामिल हो गए थे। ऐसे में प्रदेशभर के अस्पतालों में चिकित्सकीय सेवाएं एवं व्यवस्थाएं पूरी तरह से बेपटरी हो गई थी और अस्पतालों में भर्ती मरीजों की न सिर्फ जान पर बन आई, बल्कि हड़ताल के चलते समय पर इलाज नहीं मिलने से प्रदेशभर में दो दर्जन से अधिक मरीजों की जान भी चली गई है।
सचिवालय में आज दोपहर दो बजे शुरू हुई के दौरान 33 सूत्रीय मांगों के एक-एक बिंदु पर दोनों पक्षों के बीच विचार हुआ, जिसके बाद समझौते के ड्राफ्ट पर दोनों पक्षों ने हस्ताक्षर किए। इससे पहले शाम करीब पांच डॉ. चौधरी और उनके साथी सरकार के साथ चल रही बातचीत को बीच में छोड़कर एक बार बाहर आ गए थे। उन्होंने मंत्री और अफसरों पर डॉक्टरों की मांगों को लेकर अड़ियल रवैया अपनाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी हठधर्मिता नहीं छोड़ना चाहती। दरअसल, उस वक्त रेजीडेंट डॉक्टर्स की मांगों, ग्रेड पे, एरियर और एकल पारी में ड्यूटी की मांग पर गतिरोध बना हुआ था।
अरिस्दा एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष और चूरू सीएमएचओ डॉ. अजय चौधरी ने बताया कि सरकार के साथ हुई वार्ता में चिकित्सकों की लगभग सभी मांगों को मान लिया गया है। सकारात्मक माहौल में हुई इस वार्ता में हालांकि कई बार माहौल गर्म हुआ और वार्ता बीच में ही टूटती नजर आई। वार्ता के दौरान ही मौके पर भारी पुलिस जाब्ता बलाए जाने को लेकर एकबारगी तो चिकित्सकों में गिरफ्तारी का भय भी बना, लेकिन आखिरकार वार्ता में सहमति बन गई और हड़ताल समाप्ति का रास्ता निकल आया।
चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ की मौजूदगी में हर इस वार्ता में अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त डी बी गुप्ता, प्रमुख शासन सचिव गृह दीपक उप्रेती, प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा वीनू गुप्ता , चिकित्सा शिक्षा सचिव आनंद कुमार , वित्त सचिव मंजू राजपाल सहित अन्य अधिकारीगण शामिल थे। चिकित्सा संघ की ओर से अध्यक्ष डॉ अजय चौधरी, डॉ जगदीश मोदी, डॉ लक्ष्मण ओला, डॉ नसरीन भारती, डॉ मोहन लाल सिंधी शामिल थे।
उल्लेखनीय है कि अपनी 33 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेशभर में सेवारत चिकित्सक छह नवंबर से हड़ताल पर चले गए थे, जिसके बाद उनके समर्थन में रेजीडेंट डॉक्टर्स भी शामिल हो गए थे। ऐसे में प्रदेशभर के अस्पतालों में चिकित्सकीय सेवाएं एवं व्यवस्थाएं पूरी तरह से बेपटरी हो गई थी और अस्पतालों में भर्ती मरीजों की न सिर्फ जान पर बन आई, बल्कि हड़ताल के चलते समय पर इलाज नहीं मिलने से प्रदेशभर में दो दर्जन से अधिक मरीजों की जान भी चली गई है।

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