21वां फाल्गुन महोत्सव जवाहर रंगमंच पर कल
अजमेर। अजमेर में प्रतिवर्ष होली के अवसर पर होने वाला फाल्गुन महोत्सव कल 12 मार्च को दोपहर 1:30 बजे जवाहर रंगमंच पर मनाया जाएगा। महोत्सव की तैयारियां जोरों पर हैं। इसका आयोजन अजमेर के मीडियाकर्मी,रंगकर्मी, नाट्यकर्मी, साहित्यकार, विभिन्न स्वयं सेवी सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि आदि मिलकर करते हैं। नगर निगम, अजमेर विकास प्राधिकरण, अजमेर डेयरी आदि संस्थाएं सहयोग करती हैं।
यह आयोजन वर्ष पर्यंत अजमेर में घटी विभिन्न गतिविधियों का आइना माना जाता है। महोत्सव में होली के माहौल के अनुरूप शहर के राजनेताओं, प्रशासनिक अधिकारियों पत्रकारों, साहित्यकारों में से ही मूर्खाधिपति,महामूर्ख और मूर्खराज का चयन होता है। महोत्सव में अजमेर के राजनीतिक घटनाक्रम से जुड़ी झलकियां भी प्रस्तुत की जाती है। प्रबुद्ध नागरिकों को मंच पर बुलाकर अवार्ड से नवाजा जाता है। महोत्सव के सभी कार्यक्रमों की तैयारियां जोरों पर हैं।
कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए शहर भर के रंगकर्मी झलकियों का अभ्यास लगातार कर रहे हैं, जवाहर रंगमंच की साज सज्जा के लिए पूरा दल जुटा हुआ है। जाने-माने पत्रकार और साहित्यकार गणमान्य व्यक्तियों को अवार्ड और टाइटल्स आवंटित करने के काम में जुटे हुए हैं। अवार्ड के लिए जो अतिथि मंच पर आएगा,उस अतिथि की प्रवृत्ति के अनुरूप फिल्मी गीत बजाया जाएगा।
रंगगुलाल का इस्तेमाल नहीं होता:
इसकार्यक्रम की खास पहचान यह है कि इसमें होली का रंगारंग माहौल होने के बावजूद रंग गुलाल आदि का कोई इस्तेमाल नहीं किया जाता।
यह आयोजन वर्ष पर्यंत अजमेर में घटी विभिन्न गतिविधियों का आइना माना जाता है। महोत्सव में होली के माहौल के अनुरूप शहर के राजनेताओं, प्रशासनिक अधिकारियों पत्रकारों, साहित्यकारों में से ही मूर्खाधिपति,महामूर्ख और मूर्खराज का चयन होता है। महोत्सव में अजमेर के राजनीतिक घटनाक्रम से जुड़ी झलकियां भी प्रस्तुत की जाती है। प्रबुद्ध नागरिकों को मंच पर बुलाकर अवार्ड से नवाजा जाता है। महोत्सव के सभी कार्यक्रमों की तैयारियां जोरों पर हैं।
कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए शहर भर के रंगकर्मी झलकियों का अभ्यास लगातार कर रहे हैं, जवाहर रंगमंच की साज सज्जा के लिए पूरा दल जुटा हुआ है। जाने-माने पत्रकार और साहित्यकार गणमान्य व्यक्तियों को अवार्ड और टाइटल्स आवंटित करने के काम में जुटे हुए हैं। अवार्ड के लिए जो अतिथि मंच पर आएगा,उस अतिथि की प्रवृत्ति के अनुरूप फिल्मी गीत बजाया जाएगा।
रंगगुलाल का इस्तेमाल नहीं होता:
इसकार्यक्रम की खास पहचान यह है कि इसमें होली का रंगारंग माहौल होने के बावजूद रंग गुलाल आदि का कोई इस्तेमाल नहीं किया जाता।

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