घनश्याम तिवाड़ी ने दिया जवाब, नोटिस को बताया सच्ची निष्ठा का तिरस्कार
जयपुर। पार्टी साइडलाइन पर चल रहे जयपुर के सांगानेर से भाजपा विधायक घनश्याम तिवाड़ी को भाजपा की राष्ट्रीय अनुशासन समिति की ओेर से दिए गए नोटिस का आज घनश्याम तिवाड़ी ने जवाब दिया है। नोटिस के जवाब में तिवाड़ी ने कहा कि, 'रामचंद्र कह गए सिया से, ऐसा कलजुग आएगा। हंस चुगेगा दाना दुनका, कौवा मोती खाएगा।' वहीं इस लोकोक्ति के साथ ही तिवाड़ी ने नोटिस को सच्ची निष्ठा का तिरस्कार एवं श्रेष्ठ-मूल्यों के प्रति समर्पण की भावना से कार्य करने वाले कार्यकर्ता का अपमान बताया है। गौरतलब है कि तिवाड़ी को कुछ ही दिनों पूर्व भाजपा की राष्ट्रीय अनुशासन समिति के अध्यक्ष गणेशीलाल की ओर से नोटिस दिया गया था, जिसका 10 दिनों में जवाब मांगा गया था।
नोटिस का जवाब देते हुए घनश्याम तिवाड़ी ने लिखा कि, 'आपके नोटिस से राजस्थान की राजनीति में यह बात चरितार्थ होती दिखाई दे रही है। राजस्थान में वे लोग जिनकी विचारधारा, कार्यकर्ताओं, संगठन, और जनता के प्रति कोई निष्ठा नहीं है — वे पार्टी के द्वारा पुरस्कृत हैं। वे कार्यकर्ता जिन्होंने अपना पूरा जीवन खपा दिया, आपातकाल में मृत्युतुल्य पीड़ा सही, विपरीत परिस्थितियों का सामना कर जनसंघ, जनता पार्टी और फिर भाजपा को प्रदेश में खड़ा किया, जो आज भी दीनदयालजी, दत्तोपंतजी, बालासाहेब के विचार और दर्शन के प्रति अपनी निष्ठा क़ायम रखे हुए हैं, जो प्रदेश की राजनीति में शुचिता के लिए संघर्षरत हैं — वे पार्टी के द्वारा तिरस्कृत हैं।
आपका नोटिस तिरस्कार कर रहा है सच्ची निष्ठा का। आपका नोटिस अपमान कर रहा है राजस्थान के हर उस कार्यकर्ता का जिसने श्रेष्ठ-मूल्यों के प्रति समर्पण की भावना के साथ अपना जीवन राजनीति में खपाया। आपका नोटिस राजस्थान के स्वाभिमान पर आघात है। और अगर आप यह सोचते हैं कि इस नोटिस से घबरा कर राजस्थान के कार्यकर्ता इस भ्रष्ट और निकृष्ट नेतृत्व के सामने झुक जाएँगे तो मैं बतला दूँ कि राजस्थान न झुका है, न झुकेगा, बल्कि एक नया इतिहास रचेगा। और इसकी शुरुआत 2 अक्टूबर 2015 में मुख्यमंत्री के गुर्गों द्वारा भाजपा के प्रशिक्षण शिविर में मेरे साथ की गयी बदसलूकी और जानलेवा हमले की साज़िश तथा 6 मई 2017 को आपके द्वारा भेजे गए अनुशासन हीनता के प्रशस्ति पत्र से मानी जाएगी। यदि आप राजस्थान के पार्टी कार्यकर्ताओं को अनुशासन के नाम पर दु:शासन बनने और राजस्थान की जनता का चीरहरण करने के लिए कहेंगे तो मैं आपको बतला दूँ वे इसके लिए तैयार नहीं हैं। वे राजस्थान की रक्षा करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र बनकर उठ खड़े होंगे।
आपका नोटिस केवल मुझे नहीं मिला है। आपका नोटिस राजस्थान के हर उस निष्ठावान कार्यकर्ता को मिला है जिसका प्रदेश के भ्रष्ट और सामंतवादी नेतृत्व द्वारा दमन किया जा रहा है। आपका नोटिस राजस्थान के हर उस स्वाभिमानी नागरिक को मिला है जो इस नेतृत्व से भयंकर रूप से पीड़ित और परेशान है और इससे छुटकारा चाहता है। प्रदेश नेतृत्व किस प्रकार के गुणों की खान है वह तो आपसे भी छिपा नहीं है। भाजपा के निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने दसियों बार राजस्थान के हर जिले में और पार्टी के हर छोटे-बड़े कार्यक्रम में प्रदेश नेतृत्व की रीति-नीति के प्रति अपना दुःख और आक्रोश व्यक्त किया है। संघ से जुड़े सभी संगठन — मज़दूर संघ, किसान संघ, शिक्षक संघ, विद्यार्थी परिषद, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, यहाँ तक कि स्वयं राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक तक सड़कों पर उतर कर इस सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर चुके हैं। लेकिन किसी की भी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही। केवल सामन्तवाद के रंग-ढंग के आगे पार्टी नतमस्तक हो रही है।
वैसे जिस भावना से आपने नोटिस दिया है वह मैं समझ सकता हूँ। हमलोग रामभक्त तो हैं हीं, इसलिए उनके उपर्लिखित वचन को संसार में शीघ्रातीशीघ्र सिद्ध करना हमारा धर्म बन जाता है — हमारे प्रयासों से हम कैसे जल्दी से जल्दी ऐसा कलियुग लाएँ जिसमें हंस दाना-दुनका चुगें और कव्वे मोती खाएँ इसी में तो हमारी रामजी के प्रति भक्ति की परीक्षा छिपी है! इसके लिए हम सब सिद्धांतों और मूल्यों को ताक पर रख कर येन-केन-प्रकारेण सत्ता की प्राप्ति में भी लगे हैं। हे गणेशीलालजी, इस पवित्र ईश्वरीय कार्य की सिद्धि के लिए आपको ऊपर से आदेश मिला और आपकी कलम इसका निमित्त बनी इसके लिए आप धन्यवाद के पात्र हैं! प्रभु आप पर अपनी ये कृपा सदैव बनाए रखे!'
वहीं तिवाड़ी ने नोटिस में दिए गए चार बिंदुओं का भी विस्तृत जवाब दिया है। इसमे उन्होंने लिखा कि, 'हाँ, यह सही है कि मैं पार्टी के कार्यक्रमों और बैठकों में नहीं जा रहा हूँ। इसका प्रमुख कारण है कि मुझे वहाँ जान का ख़तरा है। 2 अक्टूबर 2015 को भाजपा के प्रशिक्षण शिविर में मुझे मुख्य-अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। मैं जब वहाँ पहुँचा तो पहले गेट पर मेरे साथ मुख्यमंत्री के गुर्गों द्वारा बदसलूकी की गयी और फिर कुछ गुंडातत्वों द्वारा मुझ पर जानलेवा हमला किया गया। इस हमले में मेरे हाथ में फ़्रैक्चर भी हो गया।
आप अपने ध्यान में लाएँ कि राजस्थान में मुझ पर हुआ इस प्रकार का यह पाँचवा हमला था। इसके पहले 4 बार मुझ पर हमले का प्रयास किया जा चुका था। एक बार तो राजधानी जयपुर में पिंकसिटी प्रेस क्लब के बाहर मेरी प्रेस-वार्ता के दौरान यह दु:साहस किया गया। समय पर पुलिस फ़ोर्स के वहाँ आ जाने के कारण घटना टल गयी।'
बहरहाल, तिवाड़ी को दिए गए नोटिस का जवाब उन्होंने दे दिया है, जिसमें उन्होंने पार्टी के प्रति अपना समर्पण और अपने प्रति हो रहे व्यवहार से आहत होने के बारे में विस्तार से बताया है। ऐसे में अब पार्टी की ओर से क्या कार्यवाही की जाएगी, इस बारे में फिलहाल कुद भी नहीं कहा जा सकता। इतना जरूर है कि तिवाड़ी द्वारा दिए गए नोटिस के जवाब से राजस्थान की राजनीति और भाजपा के समीकरणों में जरूर बदलाव लाया जा सकता है।
और क्या क्या लिखा है घनश्याम तिवाड़ी ने अपने जवाब में, यहां देखिए
नोटिस का जवाब देते हुए घनश्याम तिवाड़ी ने लिखा कि, 'आपके नोटिस से राजस्थान की राजनीति में यह बात चरितार्थ होती दिखाई दे रही है। राजस्थान में वे लोग जिनकी विचारधारा, कार्यकर्ताओं, संगठन, और जनता के प्रति कोई निष्ठा नहीं है — वे पार्टी के द्वारा पुरस्कृत हैं। वे कार्यकर्ता जिन्होंने अपना पूरा जीवन खपा दिया, आपातकाल में मृत्युतुल्य पीड़ा सही, विपरीत परिस्थितियों का सामना कर जनसंघ, जनता पार्टी और फिर भाजपा को प्रदेश में खड़ा किया, जो आज भी दीनदयालजी, दत्तोपंतजी, बालासाहेब के विचार और दर्शन के प्रति अपनी निष्ठा क़ायम रखे हुए हैं, जो प्रदेश की राजनीति में शुचिता के लिए संघर्षरत हैं — वे पार्टी के द्वारा तिरस्कृत हैं।
आपका नोटिस तिरस्कार कर रहा है सच्ची निष्ठा का। आपका नोटिस अपमान कर रहा है राजस्थान के हर उस कार्यकर्ता का जिसने श्रेष्ठ-मूल्यों के प्रति समर्पण की भावना के साथ अपना जीवन राजनीति में खपाया। आपका नोटिस राजस्थान के स्वाभिमान पर आघात है। और अगर आप यह सोचते हैं कि इस नोटिस से घबरा कर राजस्थान के कार्यकर्ता इस भ्रष्ट और निकृष्ट नेतृत्व के सामने झुक जाएँगे तो मैं बतला दूँ कि राजस्थान न झुका है, न झुकेगा, बल्कि एक नया इतिहास रचेगा। और इसकी शुरुआत 2 अक्टूबर 2015 में मुख्यमंत्री के गुर्गों द्वारा भाजपा के प्रशिक्षण शिविर में मेरे साथ की गयी बदसलूकी और जानलेवा हमले की साज़िश तथा 6 मई 2017 को आपके द्वारा भेजे गए अनुशासन हीनता के प्रशस्ति पत्र से मानी जाएगी। यदि आप राजस्थान के पार्टी कार्यकर्ताओं को अनुशासन के नाम पर दु:शासन बनने और राजस्थान की जनता का चीरहरण करने के लिए कहेंगे तो मैं आपको बतला दूँ वे इसके लिए तैयार नहीं हैं। वे राजस्थान की रक्षा करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र बनकर उठ खड़े होंगे।
आपका नोटिस केवल मुझे नहीं मिला है। आपका नोटिस राजस्थान के हर उस निष्ठावान कार्यकर्ता को मिला है जिसका प्रदेश के भ्रष्ट और सामंतवादी नेतृत्व द्वारा दमन किया जा रहा है। आपका नोटिस राजस्थान के हर उस स्वाभिमानी नागरिक को मिला है जो इस नेतृत्व से भयंकर रूप से पीड़ित और परेशान है और इससे छुटकारा चाहता है। प्रदेश नेतृत्व किस प्रकार के गुणों की खान है वह तो आपसे भी छिपा नहीं है। भाजपा के निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने दसियों बार राजस्थान के हर जिले में और पार्टी के हर छोटे-बड़े कार्यक्रम में प्रदेश नेतृत्व की रीति-नीति के प्रति अपना दुःख और आक्रोश व्यक्त किया है। संघ से जुड़े सभी संगठन — मज़दूर संघ, किसान संघ, शिक्षक संघ, विद्यार्थी परिषद, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, यहाँ तक कि स्वयं राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक तक सड़कों पर उतर कर इस सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर चुके हैं। लेकिन किसी की भी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही। केवल सामन्तवाद के रंग-ढंग के आगे पार्टी नतमस्तक हो रही है।
वैसे जिस भावना से आपने नोटिस दिया है वह मैं समझ सकता हूँ। हमलोग रामभक्त तो हैं हीं, इसलिए उनके उपर्लिखित वचन को संसार में शीघ्रातीशीघ्र सिद्ध करना हमारा धर्म बन जाता है — हमारे प्रयासों से हम कैसे जल्दी से जल्दी ऐसा कलियुग लाएँ जिसमें हंस दाना-दुनका चुगें और कव्वे मोती खाएँ इसी में तो हमारी रामजी के प्रति भक्ति की परीक्षा छिपी है! इसके लिए हम सब सिद्धांतों और मूल्यों को ताक पर रख कर येन-केन-प्रकारेण सत्ता की प्राप्ति में भी लगे हैं। हे गणेशीलालजी, इस पवित्र ईश्वरीय कार्य की सिद्धि के लिए आपको ऊपर से आदेश मिला और आपकी कलम इसका निमित्त बनी इसके लिए आप धन्यवाद के पात्र हैं! प्रभु आप पर अपनी ये कृपा सदैव बनाए रखे!'
वहीं तिवाड़ी ने नोटिस में दिए गए चार बिंदुओं का भी विस्तृत जवाब दिया है। इसमे उन्होंने लिखा कि, 'हाँ, यह सही है कि मैं पार्टी के कार्यक्रमों और बैठकों में नहीं जा रहा हूँ। इसका प्रमुख कारण है कि मुझे वहाँ जान का ख़तरा है। 2 अक्टूबर 2015 को भाजपा के प्रशिक्षण शिविर में मुझे मुख्य-अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। मैं जब वहाँ पहुँचा तो पहले गेट पर मेरे साथ मुख्यमंत्री के गुर्गों द्वारा बदसलूकी की गयी और फिर कुछ गुंडातत्वों द्वारा मुझ पर जानलेवा हमला किया गया। इस हमले में मेरे हाथ में फ़्रैक्चर भी हो गया।
आप अपने ध्यान में लाएँ कि राजस्थान में मुझ पर हुआ इस प्रकार का यह पाँचवा हमला था। इसके पहले 4 बार मुझ पर हमले का प्रयास किया जा चुका था। एक बार तो राजधानी जयपुर में पिंकसिटी प्रेस क्लब के बाहर मेरी प्रेस-वार्ता के दौरान यह दु:साहस किया गया। समय पर पुलिस फ़ोर्स के वहाँ आ जाने के कारण घटना टल गयी।'
बहरहाल, तिवाड़ी को दिए गए नोटिस का जवाब उन्होंने दे दिया है, जिसमें उन्होंने पार्टी के प्रति अपना समर्पण और अपने प्रति हो रहे व्यवहार से आहत होने के बारे में विस्तार से बताया है। ऐसे में अब पार्टी की ओर से क्या कार्यवाही की जाएगी, इस बारे में फिलहाल कुद भी नहीं कहा जा सकता। इतना जरूर है कि तिवाड़ी द्वारा दिए गए नोटिस के जवाब से राजस्थान की राजनीति और भाजपा के समीकरणों में जरूर बदलाव लाया जा सकता है।
और क्या क्या लिखा है घनश्याम तिवाड़ी ने अपने जवाब में, यहां देखिए
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