चारा घोटाला मामला : लालू यादव समेत 16 दोषी करार, जगन्नाथ मिश्रा समेत 7 बरी, दोषियों को सुनाई जाएगी 3 जनवरी को सजा
रांची। चारा घोटाला मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है, जिसके तहत राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव समेत 16 आरोपियों को दोषी करार दिया गया है। वहीं इस मामले में जगन्नाथ मिश्रा समेत 7 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया है। दोषियों की सजा का ऐलान अब 3 जनवरी को किया जाएगा, तब तक सभी दोषी आरोपियों को जेल में ही रहना होगा। इसके चलते पुलिस ने लालू समेत सभी दोषी आरोपियों को हिरासत में ले लिया है।
रांची स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने चारा घोटाला मामले के कुल 34 आरोपियों में से लालू यादव समेत 16 को दोषी करार दिया है। वहीं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा समेत 7 अन्य आरोपियों को बरी किया है। इनके अतिरिक्त 11 आरोपियों की अब तक चले ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है। दोषियों को सजा का ऐलान 3 जनवरी को किया जाएगा, तब तक उन्हें जेल में ही रहना होगा। लालू को दोषी करार दिए जाने के साथ ही पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया है।
अदालत ने 950 करोड़ रुपये के चारा घोटाले से जुड़े देवघर कोषागार से 89 लाख़, 27 हजार रुपये की अवैध निकासी के मामले में फैसला सुनाया है। अवैध ढंग से धन निकालने के इस मामले में लालू प्रसाद यादव एवं अन्य के खिलाफ सीबीआई ने आपराधिक षड़यंत्र, गबन, फर्जीवाड़ा, साक्ष्य छिपाने, पद के दुरुपयोग आदि से जुड़ी भारतीय दंड संहिता की धाराओं 120 बी, 409, 418, 420, 467, 468, 471, 477 ए, 201, 511 के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी) एवं 13(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
गौरतलब है कि चारा घोटाले का खुलासा साल 1996 में सामने आया था। मामला बिहार पशुपालन विभाग में करोड़ों रुपये के घोटाले से जुड़ा है। उस वक्त लालू यादव राज्य के सीएम थे। मामले में 90 के दशक की शुरूआत में बिहार के चाइबासा सरकारी खजाने से फर्जी बिल लगाकर 37.7 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है। इस मामले में आपूर्तिकर्ताओं पर बिना सामान की आपूर्ति किए बिल देने और विभाग के अधिकारियों पर बिना जांच किए उसे पास करने का आरोप है।
1996 में इस घोटाले के उजागर होने के बाद इसकी जाँच सीबीआई को सौंपी गई। जांच के दौरान सीबीआई ने इस मामले के तार तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव से जुड़े हुए पाए। घोटालों में नाम आने की वजह से लालू प्रसाद यादव को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था और उनकी पत्नी राबड़ी देवी ने बिहार की कमान सँभाली थी। चारा घोटाले से जुड़े एक अन्य मामले में इसी वर्ष अक्टूबर में लालू प्रसाद यादव को 37 करोड़ के गबन का दोषी पाया गया था और उन्हें सजा सुनाई गई थी। 1 महीने जेल में रहने के बाद लालू यादव दिसंबर में जमानत पर रिहा हो गए थे।
रांची स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने चारा घोटाला मामले के कुल 34 आरोपियों में से लालू यादव समेत 16 को दोषी करार दिया है। वहीं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा समेत 7 अन्य आरोपियों को बरी किया है। इनके अतिरिक्त 11 आरोपियों की अब तक चले ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है। दोषियों को सजा का ऐलान 3 जनवरी को किया जाएगा, तब तक उन्हें जेल में ही रहना होगा। लालू को दोषी करार दिए जाने के साथ ही पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया है।
अदालत ने 950 करोड़ रुपये के चारा घोटाले से जुड़े देवघर कोषागार से 89 लाख़, 27 हजार रुपये की अवैध निकासी के मामले में फैसला सुनाया है। अवैध ढंग से धन निकालने के इस मामले में लालू प्रसाद यादव एवं अन्य के खिलाफ सीबीआई ने आपराधिक षड़यंत्र, गबन, फर्जीवाड़ा, साक्ष्य छिपाने, पद के दुरुपयोग आदि से जुड़ी भारतीय दंड संहिता की धाराओं 120 बी, 409, 418, 420, 467, 468, 471, 477 ए, 201, 511 के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी) एवं 13(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
गौरतलब है कि चारा घोटाले का खुलासा साल 1996 में सामने आया था। मामला बिहार पशुपालन विभाग में करोड़ों रुपये के घोटाले से जुड़ा है। उस वक्त लालू यादव राज्य के सीएम थे। मामले में 90 के दशक की शुरूआत में बिहार के चाइबासा सरकारी खजाने से फर्जी बिल लगाकर 37.7 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है। इस मामले में आपूर्तिकर्ताओं पर बिना सामान की आपूर्ति किए बिल देने और विभाग के अधिकारियों पर बिना जांच किए उसे पास करने का आरोप है।
1996 में इस घोटाले के उजागर होने के बाद इसकी जाँच सीबीआई को सौंपी गई। जांच के दौरान सीबीआई ने इस मामले के तार तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव से जुड़े हुए पाए। घोटालों में नाम आने की वजह से लालू प्रसाद यादव को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था और उनकी पत्नी राबड़ी देवी ने बिहार की कमान सँभाली थी। चारा घोटाले से जुड़े एक अन्य मामले में इसी वर्ष अक्टूबर में लालू प्रसाद यादव को 37 करोड़ के गबन का दोषी पाया गया था और उन्हें सजा सुनाई गई थी। 1 महीने जेल में रहने के बाद लालू यादव दिसंबर में जमानत पर रिहा हो गए थे।

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