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कौन है कुलभूषण जाधव और आखिर क्या है विएना संधि, जानिए सब ​कुछ एक ही जगह पर

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नई दिल्ली। पाकिस्तान में फांसी की सजा का सामना कर रहे कथित जासूस कुलभूषण जाधव के मामले में हाल ही भारत को बड़ी राहत मिली। इस मामले में अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ने भारत की दलीलों से सहमत होकर पाकिस्तान को करारा झटका ​दिया और अंतिम फैसला नहीं आने तक के लिए कुलभूषण जाधव की फांसी पर रोक लगा दी थी। अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के इस फैसले को भारत के लिए एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के फैसले से असहमत होकर इसे सतही फैसला बताया था।

ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कोर्ट आईसीजे ने कहा कि भारत-पाकिस्तान वियना संधि के तहत प्रतिबद्ध है। कोर्ट ने कहा कि पाकिस्तान को काउंसलर एक्सेस देना चाहिए और राजनयिक मदद मिलनी चाहिए। इतना ही नहीं अंतरराष्ट्रीय कोर्ट को इस मामले में सुनवाई का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि विएना संधि के अंतर्गत भारत कुलभूषण जाधव से बातचीत कर सकता है। साथ ही उन्हें कानूनी मदद भी दे सकता है। इंटरनेशनल कोर्ट ने कहा कि भारत को काउंसलर एक्सेस मिलना चाहिए। अभी ये तय नहीं है कि जाधव आतंकवादी थे या नहीं, इसलिए उन्हें काउंसल एक्सेस दिया जाना चाहिए।


आखिर कौन है जाधव और क्या है उनकी पूरी दास्तां :

मुंबई के रहने वाले कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान ने मार्च 2016 में पाकिस्तान के बलोचिस्तान से गिरफ्तार किया था। जाधव का जन्म 1970 में महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था। इनके पिता का नाम सुधीर जाधव है। जाधव ने 1987 में नेशनल डिफेन्स अकेडमी में प्रवेश लिया तथा 1991 में वे भारतीय नौसेना में शामिल हुए। भारतीय नौसेना में 14 साल गुजारने के बाद सेवानिवृति के समय से पूर्व ही रिटायरमेंट ले लिया और वह 2003 में रिटायर हो गए। जबकि उनको भारतीय नौसेना से 2022 में रिटायर होना था। भारतीय नौसेना से रिटायरमेंट लेने के बाद उन्होंने ईरान के चाबहार पोर्ट में अपना व्यापार शुरू किया।

3 मार्च 2016 को पाकिस्तान ने जाधव को पाकिस्तान के बलूचिस्तान से गिरफ़्तार किया हुआ बताया। वहीं भारत सरकार ने दावा किया कि उनका ईरान से अपहरण हुआ है। 11 अप्रैल 2017 को पाकिस्तानी मिलिट्री कोर्ट द्वारा मौत जाधव को पाकिस्तान की जासूसी करने के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई, जिसका भारतीय केंद्र सरकार व भारतीय जनता द्वारा विरोध किया गया। जब जाधव को बलूचिस्‍तान से पकड़ा गया तो उनके पास से हुसैन मुबारक पटेल के नाम का पासपोर्ट पाया गया। हालांकि गिरफ्तारी के बाद से जाधव के परिवार ने मीडिया से बातचीत करने से मना कर दिया। इसलिए उनकी जिंदगी से जुड़े ज्‍यादातर पहलू उजागर नहीं हो सके हैं।

गिरफ्तारी के एक महीने के बाद ही कुलभूषण जाधव के कबूलनामे वाला वीडियो भी पाकिस्तान ने जारी किया। हालांकि इस वीडियो की सत्यता को भारत साफ नकार चुका है। पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक जाधव ने इस्लाम धर्म अपना लिया था और एक कबाड़ी के यहां काम करता था। कुलभूषण जाधव ने वीडियो में कहा कि वो रॉ में 2013 में शामिल हुए और अभी वो नेवी के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने वीडियो में ये भी कहा है कि रॉ के निर्देश पर कराची और बलूचिस्तान में कई बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया है। भारत ने इस वीडियो को पूरी तरह से झूठा करार दिया। वहीं वीडियो में छेड़छाड़ की भी बात सामने आई।

कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान में फांसी की सज़ा सुनाए जाने के बाद भारत ने इस मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में अपील की। नीदरलैंड में हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने इस मामले में पाकिस्तान से ये सुनिश्चित करने को कहा कि सभी विकल्पों पर विचार करने से पहले और अंतिम फैसला सुनाए जाने तक कुलभूषण जाधव को फांसी नहीं दी जाए। भारत की अपील पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह भी कहा कि पाकिस्तान अगर कोर्ट के फैसले को नहीं मानता है, तो उस प्रतिबंध लगाया जा सकता है। वहीं, जाधव तक भारत की डिप्लोमेटिक पहुंच नहीं देने को कोर्ट ने विएना संधि का उल्लंघन करार दिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि दोनों देश यह मानते हैं कि जाधव भारतीय हैं। ऐसे में विएना संधि के तहत पाकिस्तान को काउंसलर एक्सेस देना चाहिए और जाधव को राजनयिक मदद मिलनी चाहिए।


क्या है विएना संधि :

सबसे पहले 1961 में आजाद और संप्रभु देशों के बीच आपसी राजनयिक संबंधों को लेकर विएना कन्वेंशन का आयोजन हुआ। इसके तहत एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय संधि का प्रावधान किया गया, जिसमें राजनियकों को विशेष अधिकार दिए गए। इसके आधार पर ही राजनियकों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों का प्रावधान किया गया। इस संधि के तहत मेजबान देश अपने यहां रहने वाले दूसरे देशों के राजनियकों को खास दर्जा देता है। इस संधि का ड्राफ्ट इंटरनेशनल लॉ कमीशन ने तैयार किया था और 1964 में यह संधि लागू हुआ। फरवरी 2017 में इस संधि पर कुल 191 देशों दस्तखत कर चुके हैं और इस संधि के तहत कुल 54 आर्टिकल हैं।

इस संधि का मकसद आजाद और संप्रभु देशों के बीच काउंसलर के संबंधों का एक खाका तैयार करना है। इसके तहत किसी भी दूसरे देश में काउंसल वहां स्थापित दूतावास से अपना काम करता है, जिसके दो अहम काम होते हैं। पहला तो ये कि वह मेजबान देश में रहने वाले अपने देश के नागरिकों के हितों की रक्षा करता है और दूसरा ये कि दो देशों के बीच आर्थिक और वाणिज्यिक संबंध स्‍थापित करता है। वैसे तो काउंसल कोई राजनयिक नहीं होता, लेकिन वह दूतावास से ही अपने काम को अंजाम देता है।

इस संधि के तहत किसी भी देश में गिरफ्तार किए गए विदेशी नागरिक के आग्रह पर पुलिस को संबंधित दूतावास या राजनयिक को फैक्स करके इसकी सूचना भी देनी पड़ती है। इस फैक्स में पुलिस को गिरफ्तार व्यक्ति का नाम, गिरफ्तारी की जगह और गिरफ्तारी की वजह भी बतानी होती है। यानी गिरफ्तार विदेशी नागरिक को राजनयिक पहुंच देनी होती है। भारत ने इसी आर्टिकल 36 के प्रावधानों का हवाला देते हुए जाधव का मामला अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में उठाया है।

इस संधि में एक प्रावधान यह भी है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में जैसे जासूसी या आतंकवाद आदि में गिरफ्तार विदेशी नागरिक को राजनयिक पहुंच दिया जाना उस वक्त आवश्यक नहीं है, जब दो देशों के बीच इस मसले को लेकर कोई आपसी समझौता किया गया हो। गौरतलब है​ कि भारत और पाकिस्तान के बीच 2008 में इसी तरह का एक समझौता हुआ था। इसी समझौते का पाकिस्तान जाधव के मामले में बार-बार हवाला दे रहा है और इसी समझौते के बहाने से पाकिस्तान जाधव को राजनयिक पहुंच देने से इनकार कर रहा है।

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